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रॉय पर अवमानना के मामले पर अलग से विचार: सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली, एजेंसी। सहारा मामले में कोई नरमी नहीं दिखाते हुये सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय और दो निदेशकों को तिहाड़ जेल भेजने का आदेश उन्हें दंडित करना नहीं है और अवमानना के मामले पर अलग से विचार किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि समूह से 10,000 करोड़ रुपये के तुरंत भुगतान की मांग कोई जमानत का मुचलका नहीं है। समूह द्वारा निवेशकों का 20 हजार करोड़ रुपया सेबी के पास जमा कराने के आदेश पर अमल के बाद अवमानना के मामले में सजा देने के बारे में अलग से विचार किया जाएगा। न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की पीठ ने कहा कि हम किसी को भी दंडित नहीं कर रहे हैं। हम तो अपने आदेश लागू कराने का प्रयास कर रहे हैं। हमने कभी नहीं कहा कि यह सजा है। अवमानना याचिका अभी भी लंबित है। हम अवमानना पर सजा के मामले में भी गौर करेंगे लेकिन अपने आदेश पर अमल कराने के बाद। न्यायालय ने कहा कि दस हजार करोड़ रुपए के भुगतान करने पर ही कंपनी के सद्भाव का पता चलेगा। इसके बाद राय और दो निदेशकों को रिहा कर दिया जायेगा। न्यायाधीशों ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि दस हजार करोड़ रुपए जमानत का मुचलका है। ऐसा नही है। यह मूलधन है जो कंपनी को अदा करना है और यह रिहाई के लिये समूह के सदभाव को दर्शायेगा। इस बीच, सहारा समूह ने अपने मुखिया सुब्रत राय और दो निदेशकों की जमानत पर रिहाई के लिये दस हजार करोड़ रुपए तुरंत अदा करने में उच्चतम न्यायालय में असमर्थता व्यक्त की है। ये तीनों चार मार्च से तिहाड़ जेल में बंद हैं। समूह ने न्यायालय से कहा कि वह 2500 करोड़ रुपए का तुरंत भुगतान कर सकता है और शेष रकम का भुगतान रॉय और दो निदेशकों रवि शंकर दुबे और अशोक राय चौधरी की रिहाई के बाद तीन सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने शर्त रखी थी कि रॉय को तभी रिहा किया जायेगा जब वह 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर देंगे। इसमें से 5,000 करोड़ रुपये बैंक गारंटी के रूप में और 5,000 करोड़ रुपये नकद देने होंगे। अदालत ने हालांकि, सहारा समूह से कहा है कि वह अपना प्रस्ताव रजिस्ट्री में दाखिल करें उसके बाद उस पर विचार किया जाएगा। शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार निवेशकों का 20,000 करोड़ रुपये जमा नहीं करने के मामले में सुब्रत रॉय और समूह के दो अन्य निदेशक 4 मार्च से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। इससे पहले 65 वर्षीय रॉय ने निवेशकों का 20,000 करोड़ रुपये सेबी को भुगतान नहीं करने को मामले में उन्हें जेल में रखने के शीर्ष अदालत के आदेश को अवैध और असंवैधानिक बताते हुये आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया था।

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